वाराणसी: धर्मनगरी काशी के कमच्छा स्थित अति प्राचीन श्री बाबा बटुक भैरव मंदिर में रविवार को भव्य 'हरियाली एवं जल विहार श्रृंगार' का ...
वाराणसी: धर्मनगरी काशी के कमच्छा स्थित अति प्राचीन श्री बाबा बटुक भैरव मंदिर में रविवार को भव्य 'हरियाली एवं जल विहार श्रृंगार' का आयोजन किया गया। बाल स्वरूप में स्वर्णमयी आसन पर विराजमान बाबा बटुक भैरव के इस अलौकिक और मनोहारी दर्शन के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह तड़के पंचामृत स्नान और मंगला आरती के बाद जैसे ही पट खुले, पूरा मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा।
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| Purvanchal Samachar |
कश्मीरी फूलों, बर्फ और 51 किलो पंचमेवे से सजा दरबार
हरियाली एवं जल विहार श्रृंगार के अवसर पर मंदिर परिसर को प्राकृतिक बगीचे का स्वरूप दिया गया था। विशेष सजावट के तहत हरे पत्तों, मौसमी फलों और आकर्षक कश्मीरी फूलों के साथ बर्फ की शीतलता प्रदान करती मनमोहक झांकी सजाई गई।
गर्भगृह में बाबा के बाल स्वरूप का 51 किलोग्राम पंचमेवे (काजू, किशमिश, बादाम, मखाना व पिस्ता) से भव्य श्रृंगार किया गया, जो श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।
स्थानीय लोगों में दिखा भारी उत्साह, दर्शनार्थी आयुषी गुप्ता ने साझा किए अनुभव
बाबा के इस दिव्य जल विहार श्रृंगार को लेकर कमच्छा सहित पूरे क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला।
दर्शन करने पहुंचीं श्रद्धालु आयुषी गुप्ता ने बताया कि:
"बाबा बटुक भैरव के जल विहार और हरियाली श्रृंगार का इंतजार भक्तों को साल भर रहता है। आज कश्मीरी फूलों और मेवों से सजे बाबा के बाल स्वरूप का दर्शन कर ऐसा लगा मानो साक्षात प्रभु की असीम कृपा की अनुभूति हो रही हो। डमरू दल के नाद और आरती ने मन को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है।"
सुबह 5 बजे से कतार, 1008 बत्ती के दीपदान से महाआरती
अलौकिक झांकी के दर्शन के लिए सुबह 5 बजे से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो देर रात तक जारी रहीं। भक्तों ने घंटों कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और बाबा के चरणों में शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
संध्या वेला में मंदिर के महंत राकेश पुरी के सानिध्य में बाबा की भव्य महाआरती उतारी गई। इस दौरान 1008 बत्ती वाले विशेष दीपदान और सवा किलो कपूर की लौ से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा। महाआरती के समय 51 साधकों ने एक साथ डमरू वादन किया, जिसकी गूंज और जयकारों से पूरा कमच्छा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर हो गया।
